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रेल हादसाः बिहार के कई स्टेशनों से चढ़े थे यात्री, रेलवे ने जारी किया हेल्पलाइन नंबर

बिहार के मधेपुरा निवासी जिस बुजुर्ग ब्रह्मदेव मंडल ने 12 डोज वैक्सीन लेने का दावा किया था, उसकी जांच रिपोर्ट आ गई है। जांच में इस बात की पुष्टि हो गई है कि उसने दो से ज्यादा डोज ली है। हालांकि उसने 12 नहीं 8 डोज ली है।

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कोविशिल्ड की सभी डोज उसने अपने जिले में ही अलग अलग महीनों में पिछले साल मार्च से इस साल 10 जनवरी के बीच लगवाई है। एक व्यक्ति का एक ही आधार कार्ड और मोबाइल नंबर पर आठ डोज वैक्सीनेशन ने सरकारी वेबसाइट कोविन की खामियों को भी उजागर कर दिया है।

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मधेपुरा के ओरई गांव के पुरैनी थाना क्षेत्र में रहने वाले 84 वर्षीय ब्रह्मदेव को लगी आठ डोज में से चार की वैक्सीनेशन रिपोर्ट हिन्दुस्तान टाइम्स के पास भी मौजूद है। वैक्सीन सर्टिफिकेट के अनुसार इन टीकों को 13 मार्च से 7 नवंबर 2021 के बीच लिया गया है।

एक सर्टिफिकेट (beneficiary reference ID 570390402565) के अनुसार ब्रह्मदेव मंडल ने दो डोज 13 अप्रैल को एक ही दिन ली थी। जांच रिपोर्ट में अधिकारी ने भी इस बात पर आश्चर्य जताया है कि कैसे एक ही दिन दो डोज लेने के बाद भी सर्टिफिकेट जारी हो गया। जबकि दो डोज के बीच कम से कम 28 दिन का गैप अनिवार्य है।

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एक अन्य सर्टिफिकेट (beneficiary reference ID 5701479124460) के अनुसार बुजुर्ग ने दो डोज 33 दिन के गैप पर पिछले साल 21 जून और 24 जुलाई को लिया था। केंद्र सरकार ने पिछले साल 12 मई को दो डोज के बीच का गैप 28 से 42 दिन से बढ़ाकर 84 दिन कर दिया था। इससे एक बार फिर वही सवाल उठता है कि कैसे कोविन पोर्टल ने मई के बाद लगवाई गई दो डोज के बीच गैप 84 दिन नहीं रखा।

तीन वैक्सीन सर्टिफिकेट पर बुजुर्ग की उम्र 84 साल और एक सर्टिफिकेट (beneficiary reference ID 570403079410) पर 67 साल अंकित है। बुजुर्ग ने सभी डोज अपने ही जिले में अलग अलग सेंटरों पर लगवाई है। उन्होंने पुरैनी हेल्थ सब सेंटर, पुरैनी प्राइमरी हेल्थ सेंटर, पुरैनी अतिरिक्त प्राइमरी हेल्थ सेंटर और पुरैनी मिडिल स्कूल पर लगे कैंप में वैक्सीन लगवाई है।

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हिन्दुस्तान टाइम्स के पास मौजूद बुजुर्ग के आधार कार्ड के अंतिम चार अंक दो सर्टिफिकेट पर लिखे आधार नंबर से मैच करते हैं। दो अन्य सर्टिफिकेट पर 12 अंकों का आधार नंबर पूरी तरह छिपा हुआ है। स्वास्थ्य अधिकारियों का मानना है कि बुजुर्ग ने ग्रामीण इलाकों में लगाए गए वैक्सीनेश कैंप में ज्यादातर डोज ली है। वहां कोविन पोर्टल पर तत्काल एंट्री और टैबलेट जैसी सुविधाएं नहीं होंगी।

यह भी हो सकता है कि वहां पर एएनएम के पास इंटरनेट का इश्यू आ रहा हो। या वैक्सीनेशन में लगाई गई एएनएम टेक्नालॉजी से ज्यादा परिचित नहीं रही हो। यह हो सकता है कि वैक्सीन लगाने के दौरान आधार कार्ड की कापी लेकर आफलाइन ही डाटा कलेक्टर किया जाता रहा हो और बाद में उसे कोविन पोर्टल पर चढ़ाया गया हो। वैक्सीनेशन को लेकर दिये गए टार्गेट को भी इन सभी के पीछे कारण माना जा रहा है। मुख्यमंत्री ने जून में बताया था कि बिहार में दस करोड़ लक्ष्य के सापेक्ष 6 करोड़ डोज लग चुकी है।

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पूरे मामले पर राज्य के स्वास्थ्य अधिकारी अब चुप्पी साधे हुए हैं। मधेपुरा के सिविल सर्जन के रूप में कार्य करने वाले अतिरिक्त मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ अब्दुल सलाम ने कहाकि हमने मंडल के दावे पर अपनी रिपोर्ट राज्य स्वास्थ्य सोसायटी, बिहार (एसएचएसबी) के कार्यकारी निदेशक को 8 जनवरी को सौंप दी।

उन्होंने इस बारे में ज्यादा जानकारी देने से मना कर दिया। जांच रिपोर्ट के बारे में भी कहा कि यह गोपनीय है। SHSB के कार्यकारी निदेशक संजय कुमार सिंह ने भी बुधवार को इस सवाल को टाल दिया। उन्होंने कहा कि मुझे उस रिपोर्ट की जानकारी नहीं है। मेरे वरिष्ठों को सौंपी गई है।

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बिहार के अतिरिक्त मुख्य सचिव, स्वास्थ्य प्रत्यय अमृत ने हालांकि इस बारे में भेजे गए मैसेज का कोई जवाब नहीं दिया है। हालांकि, उन्होंने मंगलवार को कहा था कि राज्य ने इस मुद्दे पर केंद्र को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है।

कहा कि यदि आप कानून का उल्लंघन करते हैं, तो आप यह उम्मीद नहीं कर सकते कि पुलिस आपके छोड़ देगी। यदि नियम दो खुराक लेने का है और आप 12 लेते हैं, जैसा कि मंडल ने दावा किया है। जांच में प्रथम दृष्टया पता चला कि मंडल ने अलग-अलग आईडी का इस्तेमाल किया और अपने रिश्तेदारों का भी इस्तेमाल किया। जो बिल्कुल गलत था। इस देश के प्रत्येक नागरिक को नियमों और कानून का पालन करना है। इसलिए, उसके खिलाफ एक प्राथमिकी दर्ज की गई है और उसे बहुत जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

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CoWIN पोर्टल में खामी पर अमृत ने कहा था कि यह पहली बार है जब इस तरह का पोर्टल बनाया गया है। यह एक मजबूत प्रणाली है और किसी भी प्रणाली को फुलप्रूफ होने में समय लगता है। यह एक बहुत ही अच्छा और विश्वसनीय पोर्टल है। हमने विस्तृत जांच करवाई है और अपनी रिपोर्ट भारत सरकार को सौंप दी है। हम इस मुद्दे पर केंद्र से बातचीत कर रहे हैं।

पुरैनी में बुजुर्ग के खिलाफ धोखाधड़ी समेत कई धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। मंडल ने अपनी आधार आईडी पर वैक्सीन की चार खुराक ली। इसका भौतिक अभिलेखों से सत्यापन किया गया है। जैसा कि उन्होंने पहले दावा किया था। उन्होंने मधेपुरा के पुरैनी गांव, खगड़िया के परवट्टा गांव और भागलपुर जिले के कहलगांव शहर में खुद को टीका लगाने के लिए अपनी पत्नी और अपने भतीजे की आईडी का भी इस्तेमाल किया।

मंडल ने 5 जनवरी, 13 फरवरी, 13 मार्च, 19 मई, 16 जून, 24 जुलाई, 31 अगस्त, 11 सितंबर, 22 सितंबर, 24 सितंबर, 28 दिसंबर, पिछले साल 30 दिसंबर और इस साल 4 जनवरी को वैक्सीन की खुराक लेने का दावा किया था। 13 मार्च, 24 जुलाई और 31 अगस्त को छोड़कर अन्य तिथियां उसके टीकाकरण प्रमाणपत्र पर मेल नहीं खातीं।

Source : Hindustan


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