मुजफ्फरपुर एनएच पर गाड़ियों को लूटने वाले अंतर जिला गिरोह का पुलिस ने किया खुलासा, 5 अपराधी गिरफ्तार

बिहार के मुजफ्फरपुर में स्वास्थ्य विभाग में हुई भर्ती विवादों में आ गई है. कोरोना काल में सभी कर्मियों को हटाने और फिर उन्हें बहाल करने के मामले में सिविल सर्जन डॉ एसके चौधरी की मुसीबतें बढ़ती जा रही हैं. स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस मामले में सिविल सर्जन को शो कॉज नोटिस जारी किया है. यह नोटिस मंत्रालय के विशेष कार्य पदाधिकारी आनंद प्रकाश की ओर से जारी किया गया है.

नोटिस में उनसे पूछा गया कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि पहले उन्होंने कर्मियों को हटाया और कुछ दिनों बाद फिर से उन्हें ड्यूटी पर रख लिया. इसके साथ ही स्वास्थ्य विभाग ने स्वास्थ्यकर्मियों की बहाली का आदेश रद्द करते हुए सभी कर्मियों को हटा दिया है.

यह मामला स्वास्थ्य विभाग में 740 कर्मियों की बहाली के भ्रष्टाचार से जुड़ा है. राज्य स्वास्थ्य समिति के निर्देश पर कोरोना मरीजों की देखभाल के लिए मुजफ्फरपुर सिविल सर्जन द्वारा ANM, GNM, डाटा ऑपरेटर, वार्ड बॉय और डॉक्टर के पद पर दैनिक भुगतान के आधार पर 740 भर्ती की गई. लेकिन इस बहाली को लेकर एक अधिवक्ता ने डीएम प्रणव कुमार से शिकायत की.

शिकायत के बाद डीएम ने एक जांच कमेटी बनाई. इस कमेटी का अध्यक्ष डीडीसी सुनील कुमार झा को बनाया गया. कमेटी ने जांच के बाद रिपोर्ट डीएम को सौंप दी. इससे पहले कि डीएम कोई आदेश जारी करते सिविल सर्जन एसके चौधरी ने सभी बहाली को निरस्त कर दिया. उनके इस आदेश के खिलाफ शुक्रवार को सैकड़ों स्वास्थ्य कर्मियों ने सदर अस्पताल के पास प्रदर्शन किया. उनके ऊपर लाठी चार्ज भी किया गया, लेकिन इसके बाद सिविल सर्जन ने अपना आदेश वापस ले लिया और 26 जुलाई तक सभी कर्मियों को बहाल कर दिया. लेकिन इन आदेशों के बाद स्वास्थ्य मंत्रालय की निगाह उन पर बैठ गई. स्वास्थ्य मंत्रालय ने उनके द्वारा की गई सभी भर्तियों को निरस्त कर दिया.

Input: TV9




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